ज्ञापन में बताया गया कि विवादित भूमि पर लंबे समय से कई परिवार निवास कर रहे हैं और बेदखली की आशंका से उनमें भय का माहौल है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से न्यायालयीन प्रक्रिया का सम्मान करते हुए किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया।
इस दौरान संस्थापक ताराचन्द खोयड़ावाल ने कहा कि गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा होना आवश्यक है तथा किसी भी कार्रवाई से पहले कानून और न्यायालय के आदेशों का पूर्ण पालन किया जाना चाहिए।
जिला कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि फिलहाल किसी भी आवासीय मकान का ध्वस्तीकरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल आवागमन बाधित करने वाले रास्ते को साफ कराने की कार्रवाई की जाएगी तथा पूरे मामले में नियमानुसार और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मजदूर विकास फाउंडेशन ने जिला प्रशासन के आश्वासन का स्वागत करते हुए निष्पक्ष जांच और पात्र परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।

