ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल तीन दिन का नोटिस देकर मकान खाली करने के लिए कहा गया, जो उनके अनुसार पर्याप्त समय नहीं है। उनका आरोप है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने तथा संबंधित अधिकारियों को कई बार शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायालय एवं प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी की जा रही है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से इस भूमि पर रह रहे हैं और अधिकांश परिवार मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करते हैं। उनका कहना है कि यदि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें बेदखल किया गया तो उनके सामने रहने, बच्चों की पढ़ाई और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा तथा कई परिवार सड़क पर आने को मजबूर हो सकते हैं।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, उपखंड अधिकारी, तहसीलदार, विकास अधिकारी (BDO) एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि 13 जुलाई को प्रस्तावित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा न्यायालय के आदेशों और कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
नोट: यह समाचार संबंधित ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके पक्ष पर आधारित है।
