प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामीण ने 2 जुलाई को ग्राम पंचायत चांदपुर के विकास कार्यों, सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त करने के लिए RTI आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन के जवाब में पंचायत प्रशासन ने ग्रामीण को 30 जुलाई को रिकॉर्ड के अवलोकन के लिए बुलाया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने रिकॉर्ड का केवल निरीक्षण करने के बजाय संबंधित दस्तावेजों की सत्यापित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की और पंचायत सचिव को लिखित पत्र सौंपा।
ग्रामीणों ने पत्र के माध्यम से निर्धारित अवधि में मांगी गई सूचनाओं एवं रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी रिकॉर्ड की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसके बाद ग्रामीण ने मामले को लेकर प्रथम अपील का रास्ता अपनाया।
अपीलकर्ता ने अपनी प्रथम अपील में RTI अधिनियम की धारा 7(6) का हवाला देते हुए कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो मांगी गई सूचना नियमानुसार बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसी आधार पर अपील में संबंधित रिकॉर्ड की सत्यापित प्रतियां तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
विकास कार्यों पर भी उठ रहे सवाल
रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में कथित देरी को लेकर ग्रामीणों के बीच पंचायत के विकास कार्यों और सरकारी खर्च की पारदर्शिता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कराए गए विकास कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होना चाहिए। यदि सभी कार्य नियमों के अनुसार हुए हैं, तो संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रथम अपील पर नियमानुसार सुनवाई करते हुए मांगी गई समस्त सूचना एवं दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पंचायत के विकास कार्यों और सरकारी धन के उपयोग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
अब देखना यह होगा कि प्रथम अपील पर विकास अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और चांदपुर ग्राम पंचायत से मांगे गए रिकॉर्ड ग्रामीण को कब तक उपलब्ध कराए जाते हैं।
