कार्यशाला को संबोधित करते हुए एमिड संस्था के सचिव नूर मोहम्मद ने बालक-बालिकाओं के बेहतर भविष्य और करियर निर्माण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कक्षा 10वीं और 12वीं के बाद विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शिक्षा एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के विकल्प उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मेवात क्षेत्र के बच्चे पढ़-लिखकर अपने भविष्य को बेहतर बनाएं और क्षेत्र का नाम रोशन करें, इसके लिए अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन समितियों को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने कहा कि मेवात बहुल क्षेत्र में शिक्षा के अभाव के कारण 8वीं, 10वीं और विशेषकर 12वीं के बाद बालिकाओं के ड्रॉपआउट की समस्या गंभीर है। विद्यालय प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्यों को अपने-अपने गांवों में बालिका शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास करने चाहिए।
नूर मोहम्मद ने कहा कि बालिका शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध बाल विवाह रोकने, महिलाओं के प्रति भेदभाव एवं हिंसा कम करने और समाज में जागरूकता बढ़ाने से है। उन्होंने कहा कि जब बालिकाएं शिक्षा से जुड़ी रहेंगी तो वे अपने अधिकारों और भविष्य के प्रति जागरूक होंगी तथा अपने जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बनेंगी।
विद्यालय प्रबंधन समिति की सक्रियता से बदला शिक्षा का माहौल
कार्यशाला में विद्यालय प्रबंधन समिति मैदाबास की अध्यक्ष परमीना ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके गांव में पहले लड़कियों की शिक्षा पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता था। अब समिति की ओर से हर माह बैठक आयोजित की जाती है और विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षकों से जानकारी ली जाती है। बैठकों में बालिका शिक्षा सहित विभिन्न मुद्दों पर प्रस्ताव लिए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि एमिड संस्था की ओर से विद्यालय में विषय अध्यापक उपलब्ध कराए गए, जिससे बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों को काफी मदद मिली। इसका परिणाम यह रहा कि विद्यालय का बोर्ड परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा और कोई भी विद्यार्थी फेल नहीं हुआ।
इसी प्रकार विद्यालय प्रबंधन समिति मिर्जापुर के अध्यक्ष आसू खां ने बताया कि उनके गांव में पहले शिक्षा का माहौल कमजोर था। एमिड संस्था द्वारा लगातार ग्रामीणों के साथ बैठकें करने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने से धीरे-धीरे शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर एसएमसी/एसडीएमसी की बैठक आयोजित की गई और प्रस्ताव लिया गया। इसके बाद एमिड संस्था की ओर से विद्यालय में विषय अध्यापक उपलब्ध कराए गए, जिससे बोर्ड कक्षाओं की पढ़ाई में विद्यार्थियों को लाभ मिला और विद्यालय का बोर्ड परिणाम 100 प्रतिशत रहा।
12वीं तक शिक्षा जारी रखने पर विशेष जोर
एमिड संस्था की डिप्टी डायरेक्टर श्रीमती आशा नारंग ने विद्यालय प्रबंधन समितियों के सदस्यों के अनुभव सुनने के बाद कहा कि 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हो जाते हैं। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन समितियों से अपने-अपने गांवों में बच्चों को कम से कम 12वीं तक शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि समितियों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ने से बालिका शिक्षा को और मजबूती मिल सकती है। समिति के सदस्यों को बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना चाहिए। 12वीं के बाद उच्च शिक्षा से जुड़ने वाली बालिकाएं अपने भविष्य, अधिकारों और निर्णयों के प्रति अधिक जागरूक बनती हैं।
मजबूत एसएमसी से बनेगा बेहतर शैक्षणिक वातावरण
एमिड संस्था के मैनेजिंग डायरेक्टर शाहरुख नूर ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन समिति में सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। प्रत्येक माह होने वाली बैठक में समिति के सदस्यों को शामिल होकर विद्यालय की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय प्रबंधन समिति मजबूत और सक्रिय होगी तो गांव में शिक्षा का बेहतर माहौल तैयार होगा और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए समिति को विद्यालय के शिक्षकों एवं स्टाफ के साथ मिलकर कार्य करना होगा।
कार्यशाला में एमिड संस्था के कार्मिक जुमर खान, पिंकी एवं हारून सहित विद्यालय प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष, सदस्य एवं अभिभावक मौजूद रहे।
कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने, ड्रॉपआउट रोकने और बच्चों को उच्च शिक्षा से जोड़ने में विद्यालय, अभिभावक एवं विद्यालय प्रबंधन समितियों की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है।
