दलित अधिकार केंद्र के मुख्य कार्यकारी एडवोकेट डॉ. हेमंत मीमरोठ के नेतृत्व में पहुंची टीम ने दावा किया कि 24 जून को कथा कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से कुछ लोगों द्वारा विवाद उत्पन्न किया गया, जिसके बाद हथियारों और लाठियों से हमला किया गया। संस्था के अनुसार घटना में महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों सहित लगभग 15 लोग घायल हुए तथा कथा स्थल पर लगे उपकरणों को नुकसान पहुंचाया गया।
जिला समन्वयक शैलेष गौतम ने बताया कि जांच के दौरान पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उनके खिलाफ भी प्रति-प्रकरण दर्ज कराया गया है तथा उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि कुछ लोगों ने बस्ती के रास्तों को अवरुद्ध कर दिया है, बिजली आपूर्ति बाधित की है तथा पानी की आपूर्ति बंद कर दी है, जिससे परिवारों के सामने गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं।
दलित अधिकार केंद्र की टीम ने यह भी कहा कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हुई है तथा पीड़ितों और गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है। टीम ने मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ितों को सुरक्षा, घटना में प्रयुक्त हथियारों एवं वाहन की जब्ती तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत निर्धारित सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
फैक्ट-फाइंडिंग के बाद प्रतिनिधिमंडल ने उप पुलिस अधीक्षक लक्ष्मणगढ़ श्री कैलाश जिंदल से मुलाकात कर एक मांग पत्र सौंपा और मामले में त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
दलित अधिकार केंद्र की जांच टीम में डॉ. हेमंत मीमरोठ, शैलेष गौतम, सुनीता देवी बैरवा, मांगीलाल बैरवा, शंकर लाल बौद्ध, शेरसिंह बौद्ध, एडवोकेट गिर्राज सिंह गौतम, अजय कुमार, राजेश कुमार एवं मातादीन रेगर शामिल रहे।
(नोट: समाचार में उल्लिखित आरोप फैक्ट-फाइंडिंग टीम एवं पीड़ित पक्ष के दावों पर आधारित हैं। मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।)
