बस्ती निवासियों ने बताया कि नगरपालिका की इस कार्रवाई से न केवल आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है, बल्कि बदबू के चलते रोजमर्रा का जीवन दूभर हो गया है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे डेंगू, मलेरिया और त्वचा रोग जैसी बीमारियाँ फैलने का खतरा बढ़ गया है।
इसके अलावा, ग्रामीणों ने एक बड़े खतरे की ओर इशारा करते हुए कहा कि बस्ती के पास ही स्थित एक बाँध है, जिसमें वर्षा का पानी संग्रहित होता है। उनका मानना है कचरे के रिसाव से बाँध का पानी प्रदूषित हो सकता है, जिसका सीधा असर पीने के पानी और सिंचाई पर पड़ेगा। साथ ही, क्षेत्र में घूमने वाले पशुओं के स्वास्थ्य पर भी संकट मंडरा रहा है।
इस मुद्दे पर बस्ती वासियों ने एकजुटता दिखाते हुए सामूहिक विरोध जताया। इस दौरान झुन्नू मीणा, अमर सिंह, राजकुमार, सीताराम, किशन लाल, राम स्वरूप, राजेश, गजे सिंह, मुकेश, छत्र सिंह, जलेसिंह, लाला मीणा, जितेंद्र मीणा, कमला देवी, संतोष, शान्ति और काजल सहित दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।
निवासियों ने नगरपालिका प्रशासन से तत्काल इस कचरे को हटाने और भविष्य में बस्ती के आसपास कचरा न डालने की लिखित assurance देने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगामी दिनों में बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
नगरपालिका के अधिकारियों ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।