राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टिका राम जूली ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में दलित समुदाय से आने वाला व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊँची पदवी पर क्यों न पहुँच जाए, उसे जातिगत भेदभाव से नहीं बचाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि “देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश पर दलित होने के कारण एक वकील द्वारा हमला किया जाना, रायबरेली में श्री हरिओम वाल्मीकि की निर्मम हत्या और अब एक आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या — यह सब भाजपा राज में दलितों की असुरक्षा को दर्शाते हैं।”
जूली ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भाजपा शासन ने जातिवादी व्यवस्था को और बल दिया है, जिसके चलते समाज के हर स्तर पर ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं।
उन्होंने सवाल किया कि “क्या प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी दलित समुदाय में विश्वास बहाल करने के लिए कोई बयान देने की भी जहमत उठाएंगे?”