कोटकासिम में नारद मोह लीला से शुरू हुआ रामलीला मंचन

कोटकासिम संवाददाता - देवप्रकाश शर्मा

कोटकासिम। कस्बे के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में शुक्रवार की शाम से रामलीला मंचन का शुभारंभ हुआ। विशेष बात यह रही कि यह राजस्थान की एकमात्र ऐसी रामलीला है, जिसका आयोजन दिन के समय खुले मैदान में होता है। पहले दिन लीला का शुभारंभ ‘नारद मोह लीला’ के भव्य मंचन के साथ हुआ, जिसे दर्शकों ने मंत्रमुग्ध होकर देखा।

रामलीला कमेटी अध्यक्ष नरेंद्र सोनी (लादू) की देखरेख और निर्देशक चतुर्भुज शर्मा के कुशल निर्देशन में शाम 4 बजे मंचन प्रारंभ किया गया। जैसे ही कलाकारों ने मंच पर प्रवेश किया, वातावरण भक्तिमय हो गया। मंचन के दौरान संवाद, गीत-संगीत और कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को ऐसा आभास कराया मानो स्वयं देवता धरती पर अवतरित होकर लीलाओं का प्रदर्शन कर रहे हों।

रामलीला के मीडिया प्रभारी योगेश अग्रवाल ने बताया कि कथा के अनुसार जब नारद जी गहन तपस्या में लीन थे, तब उनकी तपस्या भंग करने हेतु इंद्र देव ने कामदेव को भेजा। लेकिन कामदेव असफल होकर क्षमा मांगते हुए लौट गया। इससे नारद जी को अपने सामर्थ्य पर गर्व हो गया। वे ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समक्ष जाकर अपनी विजय का बखान करने लगे।

अपने भक्त की भलाई के लिए भगवान विष्णु ने उनके अहंकार को मिटाने की ठानी। उन्होंने अपनी माया से एक भव्य नगरी रची, जहाँ एक सुंदर राजकुमारी का स्वयंवर आयोजित किया गया। नारद जी ने विवाह हेतु भगवान विष्णु से उनका स्वरूप माँगा। विष्णु जी ने उन्हें वानरमुखी रूप देकर स्वयंवर में भेज दिया।

स्वयंवर में राजकुमारी विश्वमोहिनी ने नारद जी के वानर जैसे मुख को देखकर उन्हें अनदेखा कर दिया और अंत में भगवान विष्णु को वरमाला पहना दी। बाद में शंकर जी के गणों ने नारद जी को आईना दिखाया तो उन्हें अपने वानर रूप का अहसास हुआ।

भगवान विष्णु की लीला को छल मानकर नारद जी ने क्रोधित होकर उन्हें श्राप दिया कि वे धरती पर मानव रूप में जन्म लेंगे और पत्नी के विरह में वनों में भटकेंगे। विष्णु जी ने इस श्राप को सहर्ष स्वीकार किया और जैसे ही उन्होंने अपनी माया समेटी, नारद जी को अपनी भूल का आभास हुआ। उन्होंने क्षमा माँगी, जिसे विष्णु जी ने सहज भाव से स्वीकार कर लिया।

अंतिम दृश्य में मनु और शतरूपा ने विष्णु जी से वरदान माँगा कि वे उनके पुत्र रूप में जन्म लें। विष्णु जी ने इस वरदान को स्वीकार कर लिया। इस प्रकार मंचन का समापन हुआ तो दर्शकों की आँखें भक्ति और भावुकता से भर उठीं।

मुख्य भूमिकाओं में वरिष्ठ कलाकार योगेश अग्रवाल ने नारद जी का प्रभावशाली अभिनय कर दर्शकों का मन मोह लिया। विष्णु जी के रूप में विकास सैनी, ब्रह्मा जी के रूप में राधेश्याम सोनी और शंकर जी की भूमिका में प्रवीण सैन ने दमदार प्रस्तुति दी। लक्ष्मी और विश्वमोहिनी के रूप में संजय शर्मा, कामदेव की भूमिका में पंकज पंवार, इंद्रदेव के रूप में पीयूष गुप्ता तथा कालियादूत के रूप में योगेश ज्योतिषी ने मंचन को यादगार बना दिया।

Tara Chand Khoydawal

संस्थापक:- मजदूर विकास फाउंडेशन,संपादक:- प्रगति न्यूज़,लेखक, न्यूज़ के लिए सम्पर्क करें 8503000882

Post a Comment

धन्यवाद। आप जैसे जागरूक पाठकों का सहयोग हमें और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है, 🙏 आपके समर्थन और विश्वास के लिए पुनः धन्यवाद। प्रगति न्यूज़ हमेशा सच्ची और निष्पक्ष खबरें आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Previous Post Next Post