कार्यशाला में फाउंडेशन के संस्थापक ताराचन्द खोयड़ावाल ने वर्तमान समय में बढ़ रहे साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, लिंक फ्रॉड, OTP धोखाधड़ी तथा अन्य साइबर अपराधों से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
प्रदीप कुमार ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि RTI के माध्यम से शासन-प्रशासन में पारदर्शिता लाई जा सकती है तथा सामाजिक विकास कार्यों की निगरानी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने RTI आवेदन प्रक्रिया एवं नागरिकों के अधिकारों के संबंध में भी विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम में एडवोकेट रामौतार चौधरी ने नागरिकों के मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों पर व्याख्यान देते हुए बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक हो जाए तो समाज और राष्ट्र के विकास का मार्ग और अधिक सुगम हो जाएगा।
इस अवसर पर संगठन के विस्तार के तहत राजकपूर सारवान को जिलाध्यक्ष तथा प्रदीप कुमार को समन्वयक (Coordinator) नियुक्त किया गया।
कार्यक्रम में रघुवीर सिंह (अध्यापक), अमीलाल बौद्ध रसगन, राजकपूर सारवान, एडवोकेट रामौतार चौधरी, सुरेश कुमार, रामधन, संजय यादव (नरवास), प्रदीप कुमार (बम्बोरा), नरेंद्र सोनी (बघेरी कलां), ललित कुमार (इस्माइलपुर), विपिन कुमार (सिहाली खुर्द), गजेंद्र सिंह पूनिया (सिहाली खुर्द), संजय जोड़िया, रेखा शर्मा (जोड़िया), कमल देवी (खैरथल), विजय सिंह (खैरथल), कुसुम (तिनकीरूड़ी) सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा, RTI जागरूकता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।


