कोटपूतली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर क्षेत्र में किसानों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण समिति की बैठक के दौरान पीड़ित किसानों ने अधिकारियों के सामने पहुंचकर अपना विरोध दर्ज करवाया।
बैठक में मौजूद किसानों ने एक स्वर में नारा लगाया— “जान देंगे, जमीन नहीं देंगे”। किसानों ने स्पष्ट कहा कि वे अपने खेतों में खड़े पेड़ों को किसी भी कीमत पर कटने नहीं देंगे। उनका आरोप है कि एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस परियोजना के तहत लाखों पेड़ों की कटाई की तैयारी की जा रही है और किसानों को उनकी जमीन से वंचित किया जा रहा है।
किसानों ने सरकार की नीतियों को “दोगली” बताते हुए कहा कि अब किसान पूरी तरह जागरूक हो चुके हैं और अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी हालत में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे नहीं बनने दिया जाएगा और यह सड़क “किसानों की लाशों पर ही बनेगी”।
कार्यक्रम में पहुंचे अतिरिक्त जिला कलेक्टर ओमप्रकाश सारण ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और चिंताओं को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। वहीं प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों ने भी भरोसा दिलाया कि किसानों की बात को गंभीरता से लिया जाएगा और उच्च स्तर पर रखा जाएगा।
इस मौके पर किसान महापंचायत के प्रदेश अध्यक्ष मुसद्दीलाल यादव, प्रदेश मीडिया प्रभारी सुरेश बिजारणिया, तहसील अध्यक्ष हरसहाय तंवर, जिला अध्यक्ष बाबूलाल चौधरी सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
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