खैरथल-तिजारा, 19 मई। नीमली तिजारा में जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग की संभाग स्तरीय तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ मंगलवार को हुआ। यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में विभाग के 40 तकनीकी अधिकारियों को पीआरए (ग्रामीण सहभागिता आंकलन) अभ्यास का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों को ग्रामीणों की सहभागिता से योजनाओं की प्रभावी डीपीआर (विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन) तैयार करने की प्रक्रिया से अवगत कराना है।
कार्यशाला का शुभारंभ अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र प्रसाद ने किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण एवं भू-संरक्षण से जुड़ी योजनाओं में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इससे योजनाएं धरातल पर अधिक प्रभावी एवं उपयोगी साबित होती हैं। उन्होंने अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर स्थानीय आवश्यकताओं को समझते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान अधिकारियों को गांव स्तर पर संसाधनों की पहचान, सामाजिक एवं प्राकृतिक मानचित्रण, समस्या विश्लेषण तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से विकास योजनाएं तैयार करने के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पीआरए तकनीक के माध्यम से ग्रामीणों की जरूरतों एवं प्राथमिकताओं को समझकर टिकाऊ विकास कार्यों की बेहतर रूपरेखा तैयार की जा सकती है।
कार्यशाला में अतिरिक्त मुख्य अभियंता नरेंद्र सिंह, अधीक्षण अभियंता नरेंद्र मोथू, नवीन वशिष्ठ, यूनिसेफ से रिषभ हिमानी, प्रसून, राजीव यादव सहित विभाग के अभियंतागण एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।
