गांव रसगन में बुद्ध पूर्णिमा धूमधाम से मनाई, पंचशील और धम्म के महत्व पर दिया गया जोर

रसगन। भगवान गौतम बुद्ध की जयंती बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर गांव रसगन में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर ग्रामीणों के साथ-साथ बाहर से आए प्रबुद्धजन, उपासक-उपासिकाएं बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम का नेतृत्व धम्म कारवां को आगे बढ़ाने वाले समाजसेवी अमीलाल बौद्ध और रघुवीर सिंह बौद्ध ने किया। उनके मार्गदर्शन में बुद्ध पूर्णिमा को बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। पूरे गांव में धार्मिक और सामाजिक एकता का वातावरण देखने को मिला।

इस अवसर पर श्री जाटव समाज संस्थान की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का फूल-मालाओं एवं पंचशील के पटकों से स्वागत किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों को प्रसादी वितरित की गई।

पंचशील और बुद्ध धम्म क्यों जरूरी है?

कार्यक्रम में वक्ताओं ने पंचशील और बुद्ध धम्म के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पंचशील (अहिंसा, चोरी न करना, असत्य न बोलना, व्यभिचार से दूर रहना और नशा न करना) एक नैतिक जीवन की आधारशिला है।

बुद्ध धम्म आज के समय में इसलिए और अधिक जरूरी हो गया है क्योंकि:

  • यह मानव को शांति, करुणा और मैत्री का संदेश देता है
  • समाज में समानता और भाईचारे को बढ़ावा देता है
  • अंधविश्वास और कुरीतियों से मुक्ति दिलाता है
  • जीवन को वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण से जीने की प्रेरणा देता है

वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज पंचशील के सिद्धांतों को अपनाता है, तो सामाजिक बुराइयों को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है और एक समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में सभी ने एक स्वर में बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

Tara Chand Khoydawal

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