इंडियन अस्थमा केयर सोसायटी के सचिव धर्मवीर कटेवा ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में अनेक प्रयास किए गए हैं, जिनसे आंशिक सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जीवनशैली एवं प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार कर इस विषय को प्राथमिकता से लागू करने पर ही नशा मुक्त राजस्थान का सपना साकार हो सकता है।
राजटोफा के अध्यक्ष डॉ. रमेश गांधी ने कहा कि नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम, जो वर्ष 2007-08 में शुरू हुआ था, अब पुरानी एवं अप्रभावी कार्यप्रणाली का शिकार हो चुका है। इसे नए स्वरूप में लागू करने की आवश्यकता है।उन्होंने सुझाव दिया कि इसका नाम बदलकर “नेशनल मिशन फॉर एंडगेम” किया जाए। साथ ही राजटोफा को भी WHO सिविल सोसायटी कमीशन की तर्ज पर
पुनर्गठित कर उसमें युवा पीढ़ी, तकनीक, सोशल मीडिया और रिसोर्स मोबिलाइजेशन को शामिल किया जाए ताकि वर्ष 2030 तक तंबाकू समाप्ति के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
प्रेस वार्ता के अंत में राजटोफा के समन्वयक राजन चौधरी ने कहा कि विभिन्न स्वयंसेवी संगठन मिलकर नशा मुक्त राजस्थान बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उन्होंने बताया कि सरकार के सहयोग से “तंबाकू मुक्त पीढ़ी नीति” लागू करवाने एवं तंबाकू उन्मूलन हेतु राज्यभर में व्यापक अभियान प्रारंभ किया जा रहा है।
उन्होंने जानकारी दी कि 31 मई 2026 को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर राजस्थान के सभी जिलों में “तंबाकू का अंत” अभियान शुरू किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों के स्वयंसेवी संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा कर वार्षिक कार्ययोजना भी तैयार की गई है।
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