छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रेप से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला के जननांग में पेनिट्रेशन (प्रवेश) नहीं हुआ, लेकिन आरोपी द्वारा इजैक्युलेशन (वीर्य स्खलन) किया गया है, तो ऐसे कृत्य को पूर्ण बलात्कार नहीं बल्कि ‘बलात्कार का प्रयास’ (Attempt to Rape) माना जाएगा।
अदालत ने क्या कहा
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि
- बलात्कार की कानूनी परिभाषा के अनुसार पेनिट्रेशन का होना आवश्यक तत्व है।
- यदि पेनिट्रेशन नहीं हुआ, लेकिन आरोपी की नीयत और प्रयास स्पष्ट रूप से बलात्कार करने का था, तो यह IPC की धारा 376 (बलात्कार) के साथ धारा 511 (अपराध का प्रयास) के अंतर्गत दंडनीय होगा।
सजा में किया गया बदलाव
इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को बलात्कार का दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी।
लेकिन हाई कोर्ट ने तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि पेनिट्रेशन सिद्ध नहीं हुआ।
इसके आधार पर अदालत ने:
- आरोपी की सजा को बलात्कार (Rape) से बदलकर
- बलात्कार के प्रयास (Attempt to Rape) में परिवर्तित कर दिया।
फैसले का कानूनी महत्व
यह फैसला महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि:
- इससे बलात्कार और बलात्कार के प्रयास के बीच कानूनी अंतर स्पष्ट होता है।
- अदालत ने यह भी माना कि पेनिट्रेशन न होने के बावजूद आरोपी की नीयत और कृत्य गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं।
- ऐसे मामलों में आरोपी को सजा से छूट नहीं मिल सकती, बल्कि उसे प्रयास के अपराध के तहत दंडित किया जाएगा।
