ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि पंचायत स्तर पर लंबे समय से अनुसूचित जाति समुदाय को सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रखा गया है, जो कि भारत के संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार और पंचायती राज संस्थाओं में आरक्षण संबंधी प्रावधानों के विपरीत है।
ग्रामीणों ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 243-D का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, लेकिन ग्राम पंचायत सोरखां कलां में आरक्षण रोटेशन का पालन नहीं किया गया।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि ग्राम पंचायत सोरखां कलां में अब तक हुए सरपंच पद के आरक्षण रोटेशन की निष्पक्ष जांच करवाई जाए तथा आगामी पंचायत चुनावों में सरपंच पद को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया जाए। साथ ही भविष्य में आरक्षण प्रक्रिया को पारदर्शी एवं नियमसम्मत बनाने की भी मांग रखी गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताया कि यदि समय रहते इस गंभीर विषय पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे इसे राज्य स्तर तक उठाने को विवश होंगे। प्रशासन से शीघ्र न्यायोचित निर्णय की अपेक्षा जताई गई है।
