घटना के समय रामबाबू जाटव, कृष्ण पुत्र बल्ला राम के पास खड़ा था। तभी महेश, कृष्ण एवं उनके साथ मौजूद दो अन्य व्यक्तियों द्वारा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने एकजुट होकर रामबाबू जाटव पर हमला कर दिया।
आरोप है कि हमलावरों ने पत्थर से वार कर रामबाबू जाटव के माथे व नाक पर गंभीर चोटें पहुंचाईं। शोर सुनकर जब रामबाबू जाटव की भाभी बीच-बचाव करने पहुँची, तो आरोपियों ने उसके साथ भी अभद्रता की, जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया तथा उसकी लुगड़ी उतारकर बेअदबी की, जिससे महिला की गरिमा को ठेस पहुँची।
घटना के बाद पीड़ित परिवार न्याय की आस में पुलिस थाना पहुँचा, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही किए बिना उन्हें वापस भेज दिया गया। बाद में सामाजिक लोगों से सलाह लेकर पीड़ित पुनः पुलिस थाना खैरथल पहुँचा, जहाँ कड़ा विरोध करने के बाद शिकायत तो दर्ज की गई, लेकिन अब तक न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम सहित गंभीर आपराधिक धाराओं में मामला पंजीबद्ध किया गया।
महिला से जुड़ा यह मामला और भी गंभीर बन जाता है, क्योंकि इसमें महिला की गरिमा भंग करने जैसे आरोप शामिल हैं। इसके बावजूद पुलिस द्वारा केवल शिकायत पंजीकरण कर औपचारिकता निभाना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
