कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना, युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना तथा नशामुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए विभिन्न विभागों एवं हितधारकों के मध्य समन्वय स्थापित करना रहा।
कार्यक्रम में नशा उन्मूलन, नशे के सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों, युवाओं की भूमिका तथा नशा मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के महावीर (निजी सहायक), सोभराम सिंह (वरिष्ठ सहायक), नीरज भडाना (सूचना सहायक) तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। वहीं उजाला फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र, टपूकड़ा के संचालक राजीव कुमार अपनी टीम के साथ विशेष रूप से उपस्थित रहे।
राजीव कुमार ने नशा मुक्ति केंद्र द्वारा संचालित उपचार, पुनर्वास एवं परामर्श सेवाओं की जानकारी देते हुए बताया कि समय पर उपचार एवं परिवार के सहयोग से नशे की लत से मुक्ति संभव है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा हो तो उसे उपचार एवं परामर्श के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण, युवाओं को नशे से दूर रखने तथा जन-जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने की शपथ ली। साथ ही यह संदेश दिया गया कि नशामुक्त भारत का निर्माण तभी संभव है जब शासन, प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं एवं आमजन मिलकर निरंतर प्रयास करें। कार्यक्रम का समापन नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु सामूहिक प्रतिबद्धता व्यक्त करने एवं जन-जागरूकता अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।
