फर्जी टीसी और जाति प्रमाण पत्र से जीता था चुनाव, पूर्व सरपंच को 3 साल की जेल

मुंडावर। ग्राम पंचायत सोडावास की पूर्व सरपंच गीता देवी को फर्जी शैक्षणिक एवं जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर चुनाव लड़कर जीत हासिल करना महंगा पड़ गया। सीजेएम न्यायालय मुंडावर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उन्हें तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।

मामला वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव से जुड़ा है। आरोप था कि गीता देवी पत्नी रामसिंह जाट ने सरपंच पद के लिए नामांकन दाखिल करते समय स्वयं को 8वीं पास दर्शाने के लिए फर्जी टीसी तथा ओबीसी वर्ग का फर्जी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

सहायक लोक अभियोजक के अनुसार 18 सितंबर 2015 को इस संबंध में न्यायालय में इस्तगासा दायर किया गया था। शिकायत में प्रस्तुत शैक्षणिक एवं जाति प्रमाण पत्रों की सत्यता पर सवाल उठाए गए थे। जांच के दौरान 8वीं कक्षा की ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) फर्जी पाई गई।

इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग से संबंधित धाराओं में चालान न्यायालय में पेश किया। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सीजेएम न्यायालय मुंडावर के न्यायाधीश ने आरोपी को दोषी मानते हुए पूर्व सरपंच गीता देवी को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।

न्यायालय के इस फैसले को पंचायत चुनावों में फर्जी दस्तावेजों के उपयोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।


Tara Chand Khoydawal

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