अलवर। दलित अधिकार केंद्र एवं दलित महिला मंच, जिला अलवर के तत्वाधान में आज एक दिवसीय 'दलित महिला नेतृत्व क्षमता वर्धन' शिविर का गरिमामयी आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य वंचित वर्ग की महिलाओं में आत्मबल बढ़ाना, नेतृत्व की भावना विकसित करना और उन्हें कानूनी व संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में अलवर जिले के विभिन्न ब्लॉकों से आए करीब 70 महिला व पुरुष संभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत में केंद्र के जिला समन्वयक शैलेष गौतम ने मंच का संचालन करते हुए सभी संभागियों का स्वागत किया और संस्था के परिचय व उद्देश्यों को सामने रखा।
शिविर में उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों ने महिलाओं के सशक्तिकरण और सामाजिक समानता पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। केंद्र की राज्य समन्वयक कश्मीरा सिंह ने महिलाओं को शिक्षित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि दलित महिलाएं आज भी शोषण और हिंसा का शिकार हो रही हैं। उन्होंने दलित महिलाओं के इतिहास, अधिकारों और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सच्चे लीडर में बोलने, रहने और अपनी बात को दृढ़ता से रखने का हुनर होना चाहिए। वहीं राज्य समन्वयक एडवोकेट खुशबू सोलंकी ने कानून की जानकारी देते हुए बताया कि महिलाओं पर हिंसा रोकने के लिए कई कड़े कानून बने हुए हैं, फिर भी धरातल पर अत्याचार कम नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम (पॉक्सो/पोश एक्ट), विशाखा गाइडलाइंस, एससी-एसटी एक्ट सहित कई अन्य कानूनों की विस्तृत जानकारी दी।
इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता सरिता भारत ने पितृसत्तात्मक सोच और जातिगत व लिंग आधारित भेदभाव पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करते हैं, लेकिन आज भी वंचित वर्ग की महिलाओं को अंधविश्वास और धार्मिक परंपराओं की आड़ में दबाया जाता है, जिसे शिक्षा और जागरूकता से ही बदला जा सकता है। जय भीम बुद्धिस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष श्री शंकर लाल बौद्ध ने महिलाओं का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि महिलाएं जन्मजात मजबूत हैं और जब वे आगे बढ़ती हैं, तो रूढ़िवादी सोच उन्हें रोकने का प्रयास करती है, लेकिन उन्होंने बिना डरे निरंतर आगे बढ़ना होगा। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. छबील कुमार ने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के पालन पर जोर दिया और आर्थिक मजबूती के लिए वैवाहिक व अन्य आयोजनों में फिजूलखर्ची रोककर जमा पूंजी बढ़ाने की बात कही।
इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश वर्मा ने महिलाओं से अंधविश्वास और पाखंड जैसी कुरीतियों को छोड़कर शिक्षा की ओर अग्रसर होने की अपील की। एडवोकेट प्रकाश चंद सागर ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी दलित महिलाओं को पूर्ण आजादी नहीं मिल पाई है, उन्होंने सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सरकार की विभिन्न स्वरोजगार और उच्च शिक्षा ऋण योजनाओं की जानकारी साझा की। अध्यापिका व सामाजिक कार्यकर्ता मंजू देवी ने अपने जीवन के संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षा ही वह मार्ग है जिससे सारे रास्ते खुलते हैं और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उनका सरकारी सेवा में आना सिर्फ शिक्षा और भारतीय संविधान की बदौलत ही संभव हो पाया है।
कार्यक्रम में पुष्पा देवी, लक्ष्मी, शीला, सुशीला, निरमा बौद्ध, श्रवण कुमार, एडवोकेट भारती, एडवोकेट निशाखेरा और शेर सिंह बौद्ध सहित सभी सहभागियों ने अपनी बात रखी और सभी को समान अवसर देने व समतामूलक समाज बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
