प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब महिला ने बताया कि वह मुस्लिम समुदाय से है, तो कथित रूप से उससे कंबल वापस ले लिया गया। इस घटना से मौके पर मौजूद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने इस कार्यशैली का विरोध करते हुए इसे भेदभावपूर्ण और अमानवीय बताया।
ग्रामीणों का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि, जो सांसद जैसे संवैधानिक पद पर रह चुका हो, उससे समाज में समानता और सौहार्द की अपेक्षा की जाती है। यदि धर्म के आधार पर सहायता दी या वापस ली जाती है, तो यह सामाजिक समरसता के खिलाफ है।
हालांकि, इस मामले में पूर्व सांसद या उनके प्रतिनिधियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि कोई पक्ष अपनी सफाई या प्रतिक्रिया देना चाहता है, तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
इस घटना ने क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को जन्म दे दिया है, और लोग जनप्रतिनिधियों से निष्पक्ष एवं संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं।