बहरोड़ (अलवर) राजस्थान की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक बलजीत यादव को लेकर हिरासत में लिए जाने की सूचना सामने आई। हालांकि, अब तक किसी भी जांच एजेंसी या प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनके खिलाफ चल रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि 24 जनवरी 2025 को प्रवर्तन निदेशालय ने बलजीत यादव से जुड़े जयपुर, अलवर, दौसा और हरियाणा के रेवाड़ी सहित करीब 9–10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। यह कार्रवाई सरकारी स्कूलों में खेल सामग्री खरीद में कथित घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर की गई। छापेमारी के दौरान लगभग 31 लाख रुपये नकद, अहम दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं।
इससे पहले ACB ने दिसंबर 2024 में बलजीत यादव और चार कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। आरोप है कि सरकारी स्कूलों के लिए खेल सामग्री की खरीद में करोड़ों रुपये की अनियमितता की गई, जिसमें सामान ऊंचे दामों पर खरीदा गया और गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। ACB की इसी रिपोर्ट के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की।
हिरासत की सूचना के बीच यह भी स्पष्ट किया गया है कि अब तक बलजीत यादव की गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। वहीं, बलजीत यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को निर्दोष करार दिया है और कहा है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
फिलहाल, जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।
