विश्राम गुर्जर ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि “अरावली को संकट में झोंककर सरकार और पर्यावरण मंत्री झूठ बोलने पर उतर आए हैं। अरावली सिर्फ एक पर्वतमाला नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है।” उन्होंने कहा कि जिन लोगों की जिम्मेदारी पर्यावरण की रक्षा करने की है, वही आज उसके सबसे बड़े भक्षक बने हुए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय जनता को भ्रमित करने और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का प्रयास कर रही है। पोस्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि यह मुद्दा केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर की जनता इससे प्रभावित है।
चैनल का पक्ष स्पष्ट
इस पूरे मामले में चैनल द्वारा प्रसारित खबरें और चर्चाएं केवल जनता की आवाज़ को सामने लाने और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े गंभीर सवालों को उजागर करने के उद्देश्य से की गई हैं। चैनल किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी फैलाने के बजाय, सोशल मीडिया पर सामने आए जनभावनाओं और सार्वजनिक बयानों को समाचार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
विश्राम गुर्जर की पोस्ट भी इसी क्रम में एक सार्वजनिक प्रतिक्रिया है, जिसे समाचार मूल्य को ध्यान में रखते हुए सामने रखा गया है। चैनल का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय मुद्दे पर जनचिंता को उजागर करना है।
उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा है कि “यह सब याद रखा जाएगा”, जो इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
