हैरानी की बात यह है कि ओपीडी शुरू होने से पहले अस्पताल की सफाई हो जानी चाहिए, लेकिन डॉक्टरों की मौजूदगी के बावजूद गंदगी पर किसी का ध्यान नहीं है। आखिर अस्पताल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी कब निभाएगा?
मजदूर विकास फाउंडेशन के प्रतिनिधि साहिल कुमार ने अस्पताल पहुंचकर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया और बदहाल हालात पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इस पूरे मामले को फाउंडेशन के संज्ञान में लाते हुए उचित कार्रवाई की मांग की।
फाउंडेशन ने अस्पताल प्रबंधन और PMO की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि PMO अस्पताल की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ठीक से नहीं संभाल पा रहे हैं तो उन्हें पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा दे देना चाहिए।
सरकारी अस्पतालों में गरीब, मजदूर, किसान और असहाय लोग इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं। क्या उन्हें स्वच्छ वातावरण और सम्मानजनक इलाज पाने का अधिकार नहीं है?
सवाल यह है कि जब अस्पताल के लेबर रूम और वार्ड की यह हालत है, तो मरीजों की स्वच्छता और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग इस मामले में कब कार्रवाई करेंगे?

Post a Comment