8 साल पुराने झूठे मुकदमे से मिली मुक्ति — किशनगढ़बास कोर्ट ने पांच निर्दोष युवकों को किया बरी, अब उनके घरों में सचमुच जल उठी खुशियों के दीये

सत्य की दीपावली:
सत्य की दीपावली:

8 साल पुराने झूठे मुकदमे से मिली मुक्ति — किशनगढ़बास कोर्ट ने पांच निर्दोष युवकों को किया बरी, अब उनके घरों में सचमुच जल उठी खुशियों के दीये

खैरथल।
इस बार दीपावली से पहले ही पांच परिवारों के घरों में सत्य और न्याय की असली रोशनी जल उठी है। किशनगढ़बास के एडीजे प्रशांत चौधरी की अदालत ने आठ साल पुराने झूठे लूट और फायरिंग के मुकदमे में आज पांच निर्दोष युवकों — सोनू गुर्जर, दीपक यादव, गुलशन शर्मा, टिंकू यादव और बिरजू राजपूत — को बा-इज्जत बरी कर दिया। यह फैसला उन परिवारों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं, जिनकी दीपावली वर्षों से अंधेरे में बीत रही थी।

11 जून 2019 को किशनगढ़ रोड स्थित खिरगची टोल टैक्स पर आपसी कहा-सुनी के बाद राजनीतिक द्वेषवश इन युवकों पर लूट और फायरिंग का झूठा आरोप लगाया गया था। अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने बताया कि इस मामले में वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाते-लगाते इन परिवारों ने बहुत कुछ खो दिया — समाज का भरोसा, आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति।

आज जब न्यायालय ने सत्य को स्वीकारते हुए सभी अभियुक्तों को निर्दोष घोषित किया, तो उनके घरों में आंसुओं के साथ दीप जले — सत्य की विजय के दीप।

“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”

यह फैसला केवल पांच युवकों की जीत नहीं, बल्कि सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक बन गया है। दीपावली के इस पर्व पर जहां पूरा देश लक्ष्मी और दीप का स्वागत कर रहा है, वहीं इन पांच परिवारों के लिए यह वास्तविक दीपावली है — जहां वर्षों के अंधकार के बाद अब न्याय का उजाला फैला है।

दीपक यादव के पिता ने भावुक होकर कहा —
“हमारे घर में 8 साल बाद असली दीपावली आई है। आज के दिन ही हमारे बच्चों का नाम साफ हुआ, आज के दिन ही हमारे दिल का बोझ हल्का हुआ।”

अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने कहा कि इस फैसले से यह भी स्पष्ट संदेश गया है कि राजनीतिक द्वेष या निजी रंजिश में झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कानून की धारा 182 व 211 आईपीसी के तहत ऐसे लोगों को दंडित किया जा सकता है, ताकि निर्दोषों को भविष्य में ऐसी यातना न झेलनी पड़े।

आठ वर्षों तक अदालत की तारीखों और समाज की तिरछी निगाहों का बोझ झेलने वाले इन युवकों ने आज यह साबित कर दिया कि —
“सत्य की राह भले कांटों भरी हो, पर मंज़िल रोशनी से भरी होती है।”

किशनगढ़बास कोर्ट का यह फैसला न केवल इन परिवारों के लिए न्याय का दीप जलाने वाला क्षण है, बल्कि यह समाज को यह भी सिखाता है कि झूठ का अंधकार चाहे जितना गहरा हो, सत्य की ज्योति अंततः उसे मिटा देती है।

मुख्य तथ्य:
घटना: 11 जून 2019, खिरगची टोल टैक्स
आरोप: झूठा लूट व फायरिंग मामला
निर्णय: 8 साल बाद सभी अभियुक्त बरी
न्यायाधीश: एडीजे किशनगढ़बास प्रशांत चौधरी
अधिवक्ता: राजेश मिश्रा
संदेश: “सत्य की जीत, झूठ की हार — यही है दीपावली का असली अर्थ।”

इस दीपावली पर किशनगढ़बास के इन पांच परिवारों ने पाया जीवन का सबसे बड़ा उत्सव — सत्य की दीपावली।
क्योंकि जब न्याय मिलता है, तभी दीप सचमुच जलते हैं।

Tara Chand Khoydawal

संस्थापक:- मजदूर विकास फाउंडेशन,संपादक:- प्रगति न्यूज़,लेखक, न्यूज़ के लिए सम्पर्क करें 8503000882

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