टिका राम जूली के अनुसार, 9 जनवरी तक भाजपा को पूरी वोटर लिस्ट में केवल 4 नाम ऐसे मिले थे, जिन पर आपत्ति दर्ज की गई थी। लेकिन 10 जनवरी को गृह मंत्री अमित शाह के जयपुर दौरे और मुख्यमंत्री निवास में लगभग तीन घंटे की कथित गुप्त मंत्रणा के बाद हालात तेजी से बदले।
उन्होंने बताया कि 16 जनवरी तक भाजपा द्वारा नाम कटवाने के लिए दी गई आपत्तियों की आधिकारिक संख्या अचानक 18,896 तक पहुँच गई। मात्र 7 दिनों में 18 हजार से अधिक नामों की पहचान पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करती है।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद सरकारी मशीनरी और अधिकारियों पर दबाव बनाकर कांग्रेस समर्थक मतदाताओं को निशाना बनाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि ये 18,896 आवेदन तो केवल वही हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने भाजपा की ओर से आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है, जबकि असली खेल “स्क्रूटनी” की आड़ में चल रहा है, जहाँ लाखों मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची जा रही है।
टिका राम जूली ने अपने अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहाँ ही 20,000 से अधिक फर्जी आपत्तियाँ (Form-7) भाजपा द्वारा लगवाई गई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक ही विधानसभा में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव है, तो पूरे राजस्थान में स्थिति कितनी गंभीर होगी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजस्थान में आवश्यकता न होने के बावजूद SIR (Special Intensive Revision) के तहत आपत्तियों की समय-सीमा इसलिए बढ़ाई गई है, ताकि भाजपा के अनुरूप गड़बड़ी की जा सके। उनका दावा है कि 16 जनवरी के बाद यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी, जो लोकतंत्र की हत्या का स्पष्ट प्रमाण होगा।
नेता प्रतिपक्ष ने इस प्रक्रिया में लगे अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भाजपा के कथित “गुप्त डेटा” और दबाव में आकर एक भी वैध मतदाता का नाम काटा गया, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी।
उन्होंने दो टूक कहा—
“लोकतंत्र का अपहरण हम नहीं होने देंगे।”
— टिका राम जूली
नेता प्रतिपक्ष, राजस्थान विधानसभा
विधायक, अलवर ग्रामीण