गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित भिक्खुणी संघ डे कार्यक्रम में धम्म कारवां में शामिल उपासक-उपासिकाओं ने सहभागिता की तथा भिक्खु-भिक्खुणियों से धम्म देशना एवं बौद्ध विचारधारा से जुड़े संदेशों को सुना। कार्यक्रम के दौरान भगवान बुद्ध के जीवन, उनके धम्म और मानव कल्याण से जुड़े विचारों पर चर्चा हुई।
धम्म कारवां को निरंतर गति देने में उपासक अमीलाल बौद्ध, उपासक रघुवीर सिंह बौद्ध एवं उपासक ललित बौद्ध सहित आयोजन से जुड़े लोगों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। आयोजकों के अनुसार खैरथल-तिजारा से यह नौवां धम्म कारवां है, जिसके माध्यम से क्षेत्र के उपासक-उपासिकाएं विभिन्न बौद्ध स्थलों एवं धम्म से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।
बौद्ध अध्ययन का प्रमुख केंद्र है गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में बौद्ध अध्ययन एवं सभ्यता के लिए अलग स्कूल संचालित है। विश्वविद्यालय के अनुसार School of Buddhist Studies & Civilization की स्थापना 2011 में हुई थी और यहां बौद्ध अध्ययन में बीए, एमए, एम.फिल. तथा पीएचडी सहित विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। विश्वविद्यालय की वेबसाइट के अनुसार इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की भी उल्लेखनीय भागीदारी है तथा विभिन्न देशों से विद्यार्थी यहां अध्ययन के लिए आते हैं।
विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय छात्र प्रकोष्ठ के अनुसार यहां वियतनाम, म्यांमार, थाईलैंड, लाओ पीडीआर, दक्षिण कोरिया, मंगोलिया, अफगानिस्तान, चीन, कंबोडिया, नेपाल, अमेरिका, कनाडा, श्रीलंका, भूटान और ताइवान सहित विभिन्न देशों के विद्यार्थी अध्ययन कर चुके हैं।
दलित प्रेरणा स्थल का भी किया भ्रमण
कार्यक्रम के बाद धम्म कारवां में शामिल सभी उपासक-उपासिकाओं ने नोएडा स्थित दलित प्रेरणा स्थल एवं ग्रीन गार्डन का भ्रमण किया। यहां उन्होंने स्मारक परिसर एवं वहां स्थापित प्रतिमाओं को देखा तथा सामाजिक परिवर्तन एवं समानता से जुड़े विचारों पर चर्चा की।
यात्रा में शामिल सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में बनाए गए इस स्मारक परिसर को लेकर अपने विचार व्यक्त किए और इसे दलित समाज के इतिहास, संघर्ष एवं सामाजिक चेतना से जोड़कर देखा। दलित प्रेरणा स्थल का निर्माण वर्ष 2011 में कराया गया था और यह नोएडा के सेक्टर-95 में स्थित है।
धम्म कारवां से जुड़ रहा क्षेत्र
खैरथल-तिजारा क्षेत्र से लगातार धम्म यात्राओं का आयोजन उपासक-उपासिकाओं को बौद्ध दर्शन, सामाजिक समानता, मानवता और नैतिक जीवन के संदेशों से जोड़ने का माध्यम बन रहा है। नौवें धम्म कारवां में 62 लोगों की सहभागिता ने इस यात्रा को सामूहिक स्वरूप दिया। आयोजकों ने भविष्य में भी धम्म से जुड़े ऐसे कार्यक्रमों एवं यात्राओं को जारी रखने की बात कही।




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