कांग्रेस से भाजपा में आए विक्की चौधरी ने 22-22 की बराबरी के बाद लॉटरी से हासिल की सभापति की कुर्सी
खैरथल। खैरथल नगर परिषद के सभापति चुनाव में सोमवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। वार्ड नंबर 31 से निर्वाचित विक्रम सिंह चौधरी उर्फ विक्की चौधरी ने बेहद करीबी मुकाबले के बाद सभापति पद हासिल किया। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार खैरथल नगर परिषद के 45 वार्डों में कांग्रेस के 20, भाजपा के 8 और निर्दलीय प्रत्याशियों के 17 पार्षद निर्वाचित हुए थे।
विक्की चौधरी लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और पिछले कार्यकाल में नगर परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में रहे। इस बार उन्होंने वार्ड नंबर 31 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत दर्ज की थी। वार्ड 31 में उन्हें 340 वोट मिले और वे 149 वोटों के अंतर से विजयी हुए थे।
चुनाव परिणाम आने के बाद सभापति पद को लेकर कांग्रेस के भीतर समीकरण नहीं बने। इसी बीच विक्की चौधरी ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। उनके साथ 11 कांग्रेस पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की खबर सामने आई, जिससे खैरथल नगर परिषद में बोर्ड गठन के राजनीतिक समीकरण बदल गए।
इसके बाद सभापति पद के चुनाव में भाजपा की ओर से विक्रम सिंह चौधरी और कांग्रेस की ओर से ओमप्रकाश रोघा मैदान में रहे। दोनों प्रत्याशियों को 22-22 वोट मिलने के बाद मुकाबला बराबरी पर रहा। इसके बाद नियम के अनुसार लॉटरी के माध्यम से परिणाम तय किया गया, जिसमें विक्रम सिंह चौधरी के पक्ष में परिणाम आया और वे खैरथल नगर परिषद के सभापति निर्वाचित हुए।
इस पूरे घटनाक्रम में वार्ड नंबर 26 की निर्दलीय पार्षद जरीना का मतदान में शामिल नहीं होना भी चर्चा का विषय बना रहा। जरीना वार्ड 26 से 701 वोटों के साथ निर्वाचित हुई थीं।
15 साल की राजनीतिक यात्रा के बाद बदला सियासी रुख
विक्की चौधरी की राजनीतिक यात्रा को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज है। बताया जाता है कि वे करीब 15 वर्षों तक कांग्रेस से सक्रिय रूप से जुड़े रहे और संगठन के लिए काम करते रहे। पिछले कार्यकाल में वे नेता प्रतिपक्ष भी रहे।
उनके भाजपा में जाने के बाद खैरथल की स्थानीय राजनीति में एक बड़ा सवाल यह भी उठा कि आखिर लंबे समय से कांग्रेस के साथ रहे एक प्रमुख स्थानीय नेता को पार्टी छोड़ने की स्थिति क्यों बनी? इस घटनाक्रम के पीछे टिकट, नेतृत्व और सभापति पद को लेकर बने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। हालांकि इन दावों पर संबंधित पक्षों के आधिकारिक विस्तृत बयान अलग-अलग हो सकते हैं।
“खैरथल आजाद हो गया” बयान से उठे सवाल
सभापति निर्वाचित होने के बाद विक्रम सिंह चौधरी ने खैरथल के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही और कथित तौर पर कहा कि “खैरथल आजाद हो गया है।”
इस बयान के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में एक नया सवाल चर्चा में है—विक्की चौधरी के “आजाद” शब्द का इशारा आखिर किस ओर था? क्या यह बयान केवल राजनीतिक बदलाव को दर्शाता है या वे नगर परिषद के पिछले राजनीतिक माहौल को लेकर कोई संदेश देना चाहते थे?
इसका स्पष्ट जवाब फिलहाल विक्रम सिंह चौधरी के विस्तृत बयान से ही सामने आएगा। अब खैरथल की जनता की नजर नए सभापति के कार्यकाल और विकास कार्यों पर रहेगी।

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