खैरथल-तिजारा। रेखा शर्मा, महिला प्रकोष्ठ मजदूर विकास फाउंडेशन, गांव जोड़िया में ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम नहीं मिलने को लेकर करीब 26 मजदूरों की शिकायत सामने आई है। मजदूरों का कहना है कि वे ग्राम पंचायत में काम की मांग को लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। मजदूरों के अनुसार पंचायत स्तर पर काम उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी को लेकर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है।
शिकायत के अनुसार मजदूर जब सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी से काम की मांग करने पहुंचते हैं तो कथित तौर पर उन्हें यह बताया जाता है कि काम देना उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है। इसके बाद मजदूरों ने अपनी समस्या मजदूर विकास फाउंडेशन के प्रतिनिधि के संज्ञान में पहुंचाई है।
नए कानून के तहत 125 दिन रोजगार की गारंटी
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो चुका है। 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 देशभर में लागू हो चुका है। इसके साथ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह नई व्यवस्था लागू हुई है। नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी दी गई है, जबकि पहले यह गारंटी 100 दिनों की थी।
केंद्र सरकार के अनुसार, यदि निर्धारित समय के भीतर मांग के अनुरूप रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो संबंधित प्रावधानों के तहत श्रमिक बेरोजगारी भत्ते के हकदार हो सकते हैं। सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि पुराने मनरेगा जॉब कार्ड नई व्यवस्था में संक्रमण के दौरान मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं किए जाते।
मजदूर विकास फाउंडेशन ने लिया संज्ञान
मजदूरों की शिकायत मजदूर विकास फाउंडेशन के संज्ञान में आने के बाद संगठन की ओर से मामले की जानकारी एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है। फाउंडेशन के संस्थापक ताराचन्द खोयड़ावाल ने कहा कि मजदूरों को उनके वैधानिक अधिकारों की जानकारी दिलाना और अधिकारों से जुड़े मामलों को उचित स्तर पर उठाना संगठन का उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी श्रमिक को रोजगार की मांग के बावजूद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम नहीं मिलता है तो मामले को संबंधित पंचायत समिति स्तर के कार्यक्रम अधिकारी तथा अन्य सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। आवश्यकता होने पर निर्धारित शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत मामले को आगे भी प्रस्तुत किया जाएगा।
शिकायतकर्ताओं की पहचान रखी जाएगी गोपनीय
मजदूर विकास फाउंडेशन को शिकायत करने वाले मजदूरों के नामों की सूची प्राप्त हुई है। हालांकि, शिकायतकर्ताओं के नाम और व्यक्तिगत पहचान सार्वजनिक नहीं की जा रही है। संगठन का कहना है कि शिकायत करने वाले श्रमिकों को किसी प्रकार के दबाव, परेशानी या प्रतिकूल परिस्थिति का सामना न करना पड़े, इसलिए उनकी पहचान गोपनीय रखी जा रही है।
अब मामले में संबंधित ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति स्तर पर मजदूरों की रोजगार मांग पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फाउंडेशन की ओर से उपलब्ध शिकायत एवं दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया अपनाए जाने की बात कही गई है।
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