भीम सिंह यादव ने खेती में रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक खादों का अधिक उपयोग अपनाया, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य में भी निरंतर सुधार हो रहा है। पशुपालन के अंतर्गत उनके पास 01 देशी गाय, 01 भैंस, 02 पाड़ी एवं 01 बछड़ी है, जो उनकी आय का स्थायी आधार बनी हुई हैं।
फलोत्पादन की दिशा में उन्होंने जून 2025 में थाई एप्पल प्रजाति के बेर के 150 पौधों का रोपण किया। इस बगीचे में सरकार की योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाई गई है, जिससे जल की बचत के साथ बेहतर उत्पादन संभव हुआ है।
कृषक द्वारा स्थापित वर्मीकम्पोस्ट इकाई से नियमित रूप से जैविक खाद का उत्पादन किया जा रहा है। उत्पादित वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग वे अपने खेतों में करते हैं, वहीं अन्य इच्छुक किसानों को उत्तम गुणवत्ता के केंचुए भी उपलब्ध कराते हैं। पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था हेतु वे पिछले पांच वर्षों से नेपीयर घास का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे वर्ष भर हरा चारा सुनिश्चित हो रहा है।फसली उत्पादन में उन्होंने सामान्य गेहूं के साथ-साथ काले रंग की गेहूं प्रजाति की खेती भी अपनाई है। कृषि वानिकी के तहत खेत की मेड़ पर 300 महोगनी पौधों का रोपण कर भविष्य की आय का मजबूत आधार तैयार किया गया है।
विभागीय योजनाओं के माध्यम से भीम सिंह यादव ने फार्म पौण्ड, वर्मीकम्पोस्ट, ड्रिप सिंचाई, मिनी फव्वारा तथा तारबंदी जैसी सुविधाओं का लाभ लिया, जिस पर उन्हें अनुदान भी प्राप्त हुआ। इन सभी प्रयासों से उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
ग्राम उत्थान शिविर में प्रस्तुत यह बहुआयामी कृषि मॉडल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बना और यह संदेश दिया कि नवाचार, जैविक खेती और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
