बताया गया है कि दोनों ने समूह से उन्हें जाने देने की गुहार लगाई। घटना का वीडियो वहीं मौजूद लोगों ने बनाया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और पीड़ितों की पहचान कर उनके बयान दर्ज किए। पुलिस के अनुसार मामले में POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की गई है।
जमुई पुलिस ने मामले की जांच के लिए SDPO दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में SIT गठित की है। पुलिस ने वीडियो के आधार पर करीब सात संदिग्धों की पहचान किए जाने की जानकारी दी है और अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
मामले को लेकर बिहार की कानून-व्यवस्था और नाबालिगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के समय इलाके में पुलिस गश्त की व्यवस्था कैसी थी। वहीं, नाबालिग पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले वायरल वीडियो और पोस्ट के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स से ऐसे वीडियो आगे शेयर नहीं करने की अपील की है।
घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। इस बीच प्रशासन की ओर से मामले में दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। अब जांच में घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका स्पष्ट होने और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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