रामोतार चौधरी ने आरोप लगाया कि यह नियम किसानों के साथ अन्याय करने और बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि विदेशी उत्पादों, विशेष रूप से अमेरिका के सामान पर कर में छूट दी जाती है और भारतीय उत्पादों पर टैक्स लगाया जाता है, तो यह देश के किसानों और घरेलू उद्योग के लिए गंभीर नुकसान साबित होगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस प्रकार के फैसलों के पीछे अन्य राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय कारण हो सकते हैं, और सरकार को किसानों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए। चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों के हितों की अनदेखी की गई, तो किसान संगठन आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
राष्ट्रीय किसान महापंचायत के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसानों और कृषि संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।
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